Wednesday, April 29, 2009

नाकाम कोशिशें

जोड़ तोड़ किस्सा तो खूब गढ़ा था,
बस कम्बख़्त बयानी मात दे गयी.

दिल तो हमारा देवदास सा गमगीन था,
बेतरतीब मौसम की रवानी मात दे गयी .

डुबा देता सबको उसमें ऐसा दर्द था,
बेमौका इक चुहल अंजानी मात दे गयी.

संग सबके ठठा के हँस लेता था,पर आह
सच थी पूरी, वो कहानी मात दे गयी.

और क्या कहें, शह पे थी उनकी बिसात,
बस एक घर से अपनी रानी मात दे गयी.

Wednesday, April 15, 2009

आवारा रौनकें

ये तो बेहतर हुआ की ना पहचान पाए हमें वो,
हम होते शर्मसार, नज़रें उन्हें चुराना पड़त्ता जो.

बीती यादों के कुछ जाम छन जाते साथ उनके तो,
बेमुरव्वत बन जाते हम, बेतकल्लुफ भले हो जाते वो.

रौनक थे अपनी तमाम रंगीन महफ़िलों के वो,
क्या कहते जो हम पूछ लेते गैर महफ़िल में क्यों.

औ ज़ाया हो जाता दम वो भरा था हमने जो,
रौनक ऐसी बखुदा ना किसी और महफ़िल में हो.

Friday, April 10, 2009

दुन्दुभि

जो है सुगबुगाती, दम तोड़ती सी
दबी गुमनाम राख की परतों तले,
कुछ साँस में आग भर फूँक ऐसी मार के
चिंगार वो इक बार ज्वाला बन के जो जले .

जो सिसकती सी सारी रात खुद जले,
बन परवाना तू उस शमा को ऐसी ताब दे.
भभक उठे वो बन लपट विकराल प्रलय काल
संग अपने सारा का सारा लाक्षागृह वो ले जले.

फीके से खारे ये जलते आँसू तेरे
ना समझना तू की ये बेकार ही जले
भर के अंजुरी मार सागर में इन्हे, फिर देख
अश्रु बिंदु ये बड़वानल बन के जो जले.

डर ना जाना मेघों से खुराफाती इंद्र के
साथ मधुसूदन, बुलंद रख तेरे तू हौसले.
चाप चढ़ा गांडीव तू आकाश ये टंकार दे,
फिर बता समूचा खांडव वन जो ना जले.