आ गई जो धंधे में मंदी
बदल पोर्टफोलियो दस्यूराज वाल्मीकि हो गये.
शौकिया इश्क़ की जब बोतल मिली,
धर दबोच मौका दरुहल सभी देवदास हो गये.
सुध ना रही थी आई ऐसी फटे हाली,
गाहे बेगाहे यूँ ही लैला लैला चिल्ला दिए.
औ भइया जिन्हे ना पूछे था कोई,
सो यार अब लव गुरु, मजनू मियाँ हैं हो गये.
जूता चटकाए,खाक छाने हर गली,
छोड़ घर बंबई जो सारे थे भग गये.
गाँव लौट के उन्होने कुछ यूँ बघारी जो शेखी,
बस ये लगा के सब के सब हातिम ताई हो गये.
ज़हमत ना रही के लगा लें पैबंद भी,
आलस में उनके कुछ ऐसे भी दिन आ गये.
हो बिंदास जब फटी वो जीन्स है पहनी,
सब के सब जो काहिल थे, अब हाई फ़ाई हो गये.
और सुनाएँ क्या तुम्हें अब इस जमाने की,
अपने तो सभी हथकंडे पुराने हो गये.
हम भरा करते थे दम की हम एक्स हैं,
कल के लौनडे सभी अब जेनेरेशन वाई हो गये.
अपनी तो हालत क्या कहें की,
है लगा लगने घोड़े से गधे हैं हो गये.
बिठा संयुक्ता को दीवाल तो थी हमने फांदी,
सब कम्बख़त कहने लगे की दिलवाले पृथ्वीराज हो गये.
रावण बोला क्यूँ गिध सी नज़र है लगाई,
खड़े बचाने सीता को जटायु सक्के बक्के हो गये.
ऐसी हाय लगी दुनिया के सारे रावण जात की,
एक जटायु क्या सारे गिध धराशायी हो गये.
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1 comment:
ab maine toh bas kahne ke liye kaha tha, tune mujhe wakai main budha mehsoos kara diya :D
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